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 IST 3,  2010  14:17 सितंबर Last Updated :
विस्तृत ब्लॉग
 
आतंकियों का मजहब !
हिन्दुस्तान में आतंकवाद बढ़ रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश आतंकियों को पनाह दे रहे हैं। दोनों मुल्क में मुसलमानों की आबादी ज्यादा है। हर आतंकवादी मुसलमान होता है, इसलिए हर मुसलमान आतंकवादी मतलब हिंदुस्तान में रहने वाला हर मुसलमान आतंकवादी है। तभी तो हमारे मुल्क में आतंकवाद सर उठा रहा है। यह कहना है नफरत के दलदल में फंसे, गिरी हुई मानसिकता वाले लोगों का। जयपुर धमाके के बाद ये बातें सुन-सुन कर कान पक गए हैं। फ़िर वही नफरत लोगों में फ़ैल रही है। क्या सच में आतंकवाद का मजहब होता है? गुजरात में 100 में से 60० लोग मुसलमानों से नफरत करते हैं। पता नहीं क्यों, लेकिन यहा मुसलमानों को आम आदमी नहीं समझना चाहते, हमारे कई हिंदू दोस्त है उनसे हमेशा यही बहस होती रहती है और हम हमेशा कट्टरवाद के खिलाफ रहते हैं। जयपुर धमाके के बाद हमें कुछ दोस्तों के फोन आए, कहा देखा जयपुर धमाकों के पीछे भी मुसलमानों का ही हाथ है। हमने कहा आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता वे तो इंसानियत के दुश्मन हैं। सामने से जवाब दिल दहला देने वाला मिलता है, कहते है क्यों धमाको में कोई मुसलमान नहीं मरा। हमने कहा हैदराबाद मस्जिद में जो धमाके हुए वहां तो सारे मुसलमान मरे। मुंबई ट्रेन में हुए धमाको में भी तो कई मुसलमान मारे गए थे। वे कौन से मजहब से ताल्लुक रखते थे। लेकिन लोगों में नफरत का जहर इतना फ़ैल गया है की उन के अन्दर इंसानियत की जगह कट्टरवाद ने ले ली है। कहते है की अच्छा हुआ किसी हिंदू संगठन ने ही किया होगा। हमने कहा हिन्दुओं का कोई आतंकी संगठन नहीं है। कहते हैं नही हैं तो हमें बनाना चाहिए। मुसलमानों को मारने के लिए। ऐसी सोच चंद लोगो की होती तो समझा जा सकता था की वो मानसिक रूप से बीमार हैं। लेकिन एक बड़े तबके के लोग ऐसी सोच रखते हैं। उन्हें तो अब राम-रहीम के भरोसे ही छोड़ देना चाहिए। बस... आगे हम ने जवाब देना छोड़ दिया, वे खुश हो गए। उन्हें समझाना मुश्किल था। आख़िर में हम ने यही कह कर छोड़ दिया की आप सच्चे हिंदू हो तो अपना धरम क्यों छोड़ते हो। गीता में लिखा है की खून करना और खून करने के बारे में सोचना दोनों एक समान है। कोई भी मजहब किसी को मारना नहीं सिखाता। हर मजहब सद्भावना, भाईचारा और एकता का संदेश ही देता है। देश मैं फैले आतंकवाद को मिटाने से पहले हमारे अंदर बैठे आतंकी को मारना ज्यादा जरूरी है। 'खून था हिंदू का तो अल्लाह शर्मिंदा रहा और लहू था मुसलमान का तो राम कब जिंदा रहा।' आओ एक घर में रहें, मिलजुल कर रहें, क्या पता हम रहें ना रहें।
प्रबीनअवलंब बारोट,prabinbarot@gmail.com
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पहेली
अब आप लोग बताइए, उस दिन विवेक की अभिनयशाला में कितने विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया...?
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फोकस
कैदियों को थाने या अदालत ले जाना पुलिसकर्मियों का काम है, लेकिन बिजनौर में एक ऐसा वाकया पेश आया, जब दो कैदी एक नशेड़ी पुलिसकर्मी को लेकर थाने पहुंचे और पुलिस को उसकी कारगुजारी बताई।