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 IST 11,  2010  00:06 सितंबर Last Updated :
समाचार
'तीन पत्ती' की कहानी कमजोर
विजय दिनेश वशिष्ठ
मुंबई, शनिवार, फरवरी 27, 2010
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'तीन पत्ती' मेथेमेटिक्स के जीनियस प्रोफेसर वेंकट उर्फ अमिताभ बच्चन पर है जिसके सारे रिसर्च पेपर फेल हो चुके हैं। मगर थ्योरी ऑफ प्रोबेबिलिटी पर काम करते-करते प्रोफेसर अचानक एक नई खोज कर डालता है। ये है प्रोबेबिलिटी रेन्डमनेस और अनसर्टेनिटी के सिद्धांतों का ताश के खेल में इस्तेमाल और उससे शर्तिया जीत होती है। वेंकट का साथी प्रोफेसर शांतनु उर्फ माधवन इस खोज को जुए में इस्तेमाल करके नया मोड़ दे देता है और यहीं से प्रोफेसर वेंकट और उसके छात्र जाने अनजाने में इस खेल में धंसते चले जाते हैं। मगर इनकी अंधाधुंध कमाई का राज़ किसी ब्लैकमेलर को भी पता है जो बर्बादी की शुरुआत है। 

'तीन पत्ती' का बेसिक प्लॉट हॉलीवुड फिल्म 'ट्वेन्टीवन' से उठाया गया है। मगर जिस थ्योरी ऑफ प्रोबेबिलिटी पर ये फिल्म बनाई गई उसी थ्योरी का इस्तेमाल जुए में ढंग से नहीं दिखा। इसीलिए सब कुछ अविश्वसनीय लगता है। स्क्रीन पर वीडियो इफेक्ट्स से गणित के चार फार्मूले दिखाकर अंधाधुंध कमाई का लॉजिक समझाया नहीं जा सकता। आम आदमी के लिए कॉम्प्लीकेटेड और इंटेलेक्चुएल ऑडियंस को 'तीन पत्ती' सिर्फ ऊपरी तौर पर इंटेलिजेंट लगेगी।

'तीन पत्ती' की कहानी भी तीन टुकड़ों में बंटी हुई है। पहला जुआ, दूसरा ब्लैकमेलिंग और तीसरा जुए से छात्रों की बर्बादी। पहला हाफ फिर भी ठीक है मगर इंटरवेल के बाद डायरेक्टर ने फिल्म स्टूडेंट्स के लड़ाई झगड़े और नकली इमोशन्स में फंसा दी। अफसोस कि लीना यादव न तो अमिताभ बच्चन न ही सर बेन किंगस्ले के टेलेंट का इस्तेमाल कर पाईं।

फिल्म में अमिताभ का एक डायलॉग है। जो है वो नहीं है और जो नहीं है वो हो सकता है। ये फिल्म भी अच्छी बन सकती थी मगर कहानी का हाल खराब है। डायरेक्टर लीना यादव ने ऐश्वर्या को लेकर 'शब्द' बनाई थी और अब अमिताभ की इस फिल्म ने मुझे 'निशब्द' कर दिया। 'तीन पत्ती' के लिए मेरी रेटिंग है 2 स्टार।

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बच्चन जी का फिल्मी करियर अब आखिरी बिंदु पर है। उनकी इस अवस्था का उन्हें कब तक साथ मिलता रहेगा, यह भगवान ही जाने?
पीताम्बर ठाकवानी, pitamber.thakwani@gmail.com, वेस्तेर्विल्ले,अमेरीका
तुलसीदास ने कहा है कि-समरथ को नहीं दोष गोसाईं... आज बच्चन जी की हर फिल्म न भी चले तो भी चलती मानी जाती है उनका ज़माना जो है सच मानें तो पा फिल्म भी बिलकुल ... पढ़ें
पीताम्बर ठाकवानी , pitamber.thakwani@gmail.com, वेस्तेर्विल्ले,अमेरीका
 
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