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 IST 3,  2010  14:40 सितंबर Last Updated :
समाचार
'रण' में नहीं है दम
विजय दिनेश वशिष्ठ
मुंबई, शुक्रवार, जनवरी 29, 2010
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'रण' का प्रमोशन करते वक्त रामगोपाल वर्मा, अमिताभ बच्चन के संग न्यूज चैनल्स के दफ्तर में जाकर वहां काम करने के तौर-तरीके समझ रहे थे। काश रामू ने 'रण' की स्क्रिप्ट लिखवाने से पहले ऐसा किया होता।

पहला सीन − देश के सबसे प्रतिष्ठित टीवी चैनल के ईमानदार मालिक विजय हर्षवर्धन के पास किसी गुमनाम शख्स की ओर से स्टिंग ऑपरेशन की सीडी आती है और वह खबर की पुष्टि किए बगैर सीडी चैनल पर चला देता है। पीएम को देशद्रोही घोषित कर देता है। जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल का मजाक...

दूसरा सीन − मीडिया किंग तीन-चार टॉप अफसरों के साथ पॉलिसी मेकिंग डिसीजन ले रहा है और इनमें शामिल है एक नया रिपोर्टर भी।

तीसरा सीन − प्रतिद्वंदी न्यूज चैनल का हेड एक रिपोर्टर को बता रहा है कि कैसे उसने खुद का ईमान 500 करोड़ रुपये में बेचा।

चौथा सीन − एक आला अधिकारी अपने न्यूज चैनल से गद्दारी का पेमेंट ले रही है…चेक से।

पांचवां सीन − प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह टल जाता है, क्योंकि सारे पत्रकारों को एक साथ फोन पर पीएम के भ्रष्टाचार की खबर मिलती है।

'रण' मीडिया की सतही जानकारी को लेकर बनी फिल्म है, जहां भरी महफिल में दूसरे का कॉलर पकड़ते हैं, बंदूक की नोंक पर स्टिंग ऑपरेशन कराते हैं।

नया कन्सेप्ट…अमिताभ बच्चन, सुदीप, रितेश देशमुख और राजपाल यादव के अच्छे परफॉरमेंस। ’रण’ बताती है कि डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा को मीडिया की कितनी समझ है। इस कमजोर फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है 1.5 स्टार।
टिप्पणियां:
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टिप्पणियां
विजय वशिष्ठ को आईने में दिखने वाली शक्ल से डर लग गया।
GS, qquidd@yahoo.com, बोस्टन
कौन कहता हैं रण मैं दम नहीं।
kelly, kellyla16@yahoo.com, swiss
आपका आर्टिकल बता रहा है कि आपको जलन हो गई है। आपके कहने से अच्छी फिल्म खराब नहीं हो जाएगी।
gagan, gaganmusafir@gmail.com, अहमदाबाद
 
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पहेली
अब आप लोग बताइए, उस दिन विवेक की अभिनयशाला में कितने विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन करवाया...?
एनडीटीवीख़बर.कॉम

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फोकस
कैदियों को थाने या अदालत ले जाना पुलिसकर्मियों का काम है, लेकिन बिजनौर में एक ऐसा वाकया पेश आया, जब दो कैदी एक नशेड़ी पुलिसकर्मी को लेकर थाने पहुंचे और पुलिस को उसकी कारगुजारी बताई।