मुरली मैजिक ने दिलाई शर्मनाक हार : कुंबले
भाषा
कोलंबो,
शनिवार,
जुलाई 26,
2008
'मिस्ट्री' स्पिनर अजंता मेंडिस ने श्रीलंका की तरफ से अपने पदार्पण टेस्ट में ही भले आठ विकेट लिये लेकिन भारतीय कप्तान अनिल कुंबले का मानना है कि 'मैजिसियन' मुथैया मुरलीधरन ने पहले टेस्ट में उनकी शर्मनाक हार में निर्णायक भूमिका निभाई।
भारत की पारी और 239 रन से करारी हार के बाद कुंबले ने कहा, 'दोनों स्पिनरों मुरली और मेंडिस ने वास्तव में बेहतरीन गेंदबाजी की। मेंडिस श्रीलंका के लिए शानदार खोज हैं लेकिन आप मुरली को इससे अलग नहीं कर सकते। असल में हमारी हार में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई।'
कुंबले ने कहा कि श्रीलंका की पहली पारी में छह विकेट पर 600 रन के विशाल स्कोर के सामने भारत की मशहूर बल्लेबाजी के लिए मैच बचाना बहुत कठिन था। उन्होंने कहा, 'पहली पारी में 600 रन देने के बाद हम जानते थे कि मैच ड्रा कराना आसान नहीं है। यदि हमने पहले बल्लेबाजी की होती तो इस पिच पर हमारी टीम फायदे में रहती।'
श्रीलंकाई कप्तान महेला जयवर्धने ने अपनी टीम की जोरदार जीत का श्रेय बल्लेबाजों को दिया। उन्होंने कहा, 'हमने परफेक्ट मैच खेला। हमने जब पहली पारी में 600 रन बनाये तो हम जानते थे कि भारत पर दबाव रहेगा।'
उन्होंने कहा, 'जब आपके छह-सात बल्लेबाजों में चार बल्लेबाज शतक जमाएं तो अच्छा लगता है लेकिन प्रत्येक मैच में ऐसी लय बनाए रखना संभव नहीं है।'
मुरलीधरन ने मैच में 110 रन देकर 11 विकेट लिये और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने भी अपने कप्तान की हां में हां मिलाई।
स्पिन के इस जादूगर ने 19वीं बार मैन आफ द मैच पुरस्कार हासिल करने के बाद कहा, 'भारत की टीम बहुत अनुभवी है। मैंने और अजंता ने अच्छी गेंदबाजी की लेकिन बल्लेबाजों ने हमारे लिए नींव रखी थी।'
मुरलीधरन ने विशेष रूप से अपने युवा साथी मेंडिस की तारीफ की। उन्होंने कहा, 'अजंता ने अपने पदार्पण मैच में वास्तव में शानदार गेंदबाजी की। वह नई खोज और श्रीलंकाई क्रिकेट का भविष्य है। जब मैंने अपने कैरियर की शुरुआत की थी तो तब मैं उसकी तरह अच्छा गेंदबाज नहीं था।'