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 IST 20,  2008  20:04 नवंबर Last Updated :
खेल
मुरली, मेंडिस ने निकाला 'टीम इंडिया' का जनाजा
भाषा
कोलंबो, शनिवार, जुलाई 26, 2008
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मुरली मैजिक और मेंडिस मानिया के बेहतरीन तालमेल ने दुनिया के मशहूर बल्लेबाजों को घुटने टेकने के लिए मजबूर करते हुए भारत को पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में शनिवार को करारी हार और श्रीलंका को पारी व 239 रन से शानदार जीत दिलाई।

भारत के दिग्गज बल्लेबाजों के पास मुथैया मुरलीधरन का कोई जवाब नहीं था जबकि अजंता मेंडिस की रहस्यमयी गेंद उनकी समझ से परे थी। इसका असर यह हुआ कि पहले दिन का अधिकतर खेल बारिश की भेंट चढ़ने के बावजूद श्रीलंका को चौथे दिन ही जीत मिल गई। भारत ने 14 विकेट गंवाए और यह सभी इन दोनों स्पिनरों के नाम पर दर्ज हुए।

श्रीलंका ने चार शतकीय पारिया की मदद से अपनी पारी छह विकेट पर 600 रन बनाकर समाप्त घोषित की। तब इसे बल्लेबाजों के लिए अनुकूल पिच माना जा रहा था लेकिन इसी विकेट पर भारत पहली पारी में 223 और उसके बाद फॉलोऑन करते हुए केवल 45 ओवर में 138 रन पर सिमट गया।

मुरलीधरन और मेंडिस की स्पिन जोड़ी ने दूसरी पारी में सभी दस विकेट अपने नाम किए और इस तरह से इन दोनों ने मैच मिलाकर 19 विकेट लिए। मुरलीधरन ने 110 रन देकर 11 विकेट जबकि मेंडिस ने 132 रन देकर आठ विकेट लिये। अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे इस रहस्यमयी स्पिनर ने दोनों पारियों में चार-चार विकेट अपने नाम किए जबकि मुरली ने पहली पारी में पांच और दूसरी पारी में केवल 26 रन देकर छह विकेट लिये।

भारतीय बल्लेबाजों को लग रहा था कि वह मेंडिस के करिश्मे से पार पाने में सफल रहेंगे जिन्होंने पाकिस्तान में एशिया कप फाइनल में भारतीय बल्लेबाजी को तहस नहस करके तहलका मचा दिया था।

मेंडिस फिर से भारतीय बल्लेबाजों के लिए अजूबा ही बने रहे और उन्होंने केवल चौथे दिन सात विकेट लेकर दुनिया को फिर से एक नए स्पिनर के पदार्पण की धमक महसूस कराई। आईसीसी की नई रेफरल प्रणाली भी भारतीयों के पक्ष में नहीं गई जिसके कारण दो बल्लेबाजों को पवेलियन की राह देखनी पड़ी।

जहां तक भारतीयों का सवाल है तो वीवीएस लक्ष्मण और गौतम गंभीर को छोड़कर कोई भी अन्य इन दोनों का डटकर सामना नहीं कर पाया। लक्ष्मण ने पहली पारी में अंतिम बल्लेबाज के रूप में मेंडिस की गेंद पर बोल्ड होने से पहले टीम की तरफ से सर्वाधिक 56 रन बनाए जबकि गौतम गंभीर ने पहली पारी की तरह दूसरी पारी में भी अच्छी शुरुआत की और 43 रन की पारी खेली।

श्रीलंकाई कप्तान महेला जयवर्धने ने लंच से थोड़ी देर पहले भारत को फालोआन के लिए आमंत्रित करने के बाद मुरली और मेंडिस को गेंद सौंपने में देर नहीं लगाई। भारत ने लंच से पहले ही वीरेंद्र सहवाग (13) का विकेट गंवा दिया था जिन्हें मुथैया मुरलीधरन ने अपने पहले ओवर में ही पगबाधा आउट किया। पहली पारी के पराक्रम के कारण लक्ष्मण को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया लेकिन वह इस पारी में भी मेंडिस मानिया से नहीं उबर पाए।

रहस्यमयी गेंदबाज अजंता मेंडिस ने लक्ष्मण (21)को पगबाधा आउट करके भारत का स्कोर दो विकेट पर 53 रन कर दिया। इसके बाद श्रीलंका ने अंपायर रेफरल प्रणाली का फायदा उठाया।

मुरलीधरन की गेंद तेंदुलकर (12) के बल्ले से लगकर तिलकरत्ने दिलशान के पास गई लेकिन मैदानी अंपायर ने अपील ठुकरा दी। श्रीलंका ने इस फैसले को तीसरे अंपायर के पास रेफर करवा दिया जिन्होंने भारतीय बल्लेबाज को आउट करार दिया।

गंभीर ने एक छोर संभाले रखा लेकिन मुरलीधरन की गेंद पर प्रसन्ना जयवर्धने ने बड़ी खूबसूरती से उन्हें स्टंप आउट कर दिया। गंभीर ने टीम की तरफ से सर्वाधिक 90 गेंद खेली और सबसे अधिक चार चौके लगाए। मुरलीधरन ने जल्द ही सौरव गांगुली (4) को भी पवेलियन की राह दिखाई।

द्रविड़ चाय के विश्राम से पहले मेंडिस की गेंद पर मालिंडा वर्णपुरा को कैच दे बैठे। इस बार भी रेफरल प्रणाली ने श्रीलंका का साथ दिया। मैदानी अंपायर ने द्रविड़ को नाबाद करार दे दिया था लेकिन तीसरी आंख से पता चल गया कि वह आउट हैं।

चाय के विश्राम के समय भारत का स्कोर छह विकेट पर 103 रन था। मुरलीधरन ने चाय के बाद अपने पहले ओवर में ही दिनेश कार्तिक ( शून्य ) को आउट करके 65वीं बार पारी में पांच या अधिक विकेट और 21वीं बार मैच में दस या इससे विकेट लेने का कारनामा दिखाया।

मुरलीधरन ने इसके बाद अनिल कुंबले (12) को बोल्ड किया जबकि मेंडिस ने अपने एक ओवर में जहीर खान (3) और हरभजन सिंह (15) की गिल्लियां बिखेरकर श्रीलंका को एसएससी मैदान पर यादगार जीत दिलाई।

इससे पहले भारत ने सुबह पहली पारी में छह विकेट पर 159 रन से आगे खेलना शुरू किया। भारत को फालोआन बचाने के लिए बेजोड़ बल्लेबाजी की जरूरत थी लेकिन मुरलीधरन (84 रन देकर पांच विकेट)और मेंडिस (72 रन देकर चार विकेट) के सामने किसी की नहीं चली।

मेंडिस ने खूबसूरत लेग ब्रेक पर लक्ष्मण को बोल्ड करके भारतीय पारी का अंत किया। लक्ष्मण ने इशांत शर्मा (नाबाद 13) के साथ अंतिम विकेट के लिए 35 रन की साझेदारी की। इशांत दूसरी पारी में भी पांच रन बनाकर नाबाद रहे।

इशांत की तारीफ करनी होगी क्योंकि वह 70 मिनट तक क्रीज पर टिके रहे और उन्होंने दोनों स्पिनरों को खासा निराश किया। इससे लक्ष्मण अपना 34वां टेस्ट अर्धशतक पूरा करने में भी सफल रहे।

कुंबले के खिलाफ मेंडिस की पगबाधा की अपील जब अंपायर बिली डाक्ट्रोव ने स्वीकार कर ली तो उन्होंने रेफरल प्रणाली का सहारा लिया लेकिन तीसरे अंपायर ने भी मैदानी अंपायर का फैसला सही करार दिया।

हरभजन ने आते ही मुरलीधरन पर दो चौके जमाए लेकिन वह इसी गेंदबाज की गेंद पर वर्णपुरा को आसान कैच देकर पवेलियन लौटे। जहीर को भी मेंडिस ने पगबाधा किया।

भारतीय बल्लेबाजों को लग रहा था कि वह मेंडिस के करिश्मे से पार पाने में सफल रहेंगे जिन्होंने पाकिस्तान में एशिया कप फाइनल में भारतीय बल्लेबाजी को तहस नहस करके तहलका मचा दिया था।

मेंडिस फिर से भारतीय बल्लेबाजों के लिए अजूबा ही बने रहे और उन्होंने केवल चौथे दिन सात विकेट लेकर दुनिया को फिर से एक नए स्पिनर के पदार्पण की धमक महसूस कराई। आईसीसी की नई रेफरल प्रणाली भी भारतीयों के पक्ष में नहीं गई जिसके कारण दो बल्लेबाजों को पवेलियन की राह देखनी पड़ी।

जहां तक भारतीयों का सवाल है तो वीवीएस लक्ष्मण और गौतम गंभीर को छोड़कर कोई भी अन्य इन दोनों का डटकर सामना नहीं कर पाया। लक्ष्मण ने पहली पारी में अंतिम बल्लेबाज के रूप में मेंडिस की गेंद पर बोल्ड होने से पहले टीम की तरफ से सर्वाधिक 56 रन बनाए जबकि गौतम गंभीर ने पहली पारी की तरह दूसरी पारी में भी अच्छी शुरुआत की और 43 रन की पारी खेली।

श्रीलंकाई कप्तान महेला जयवर्धने ने लंच से थोड़ी देर पहले भारत को फालोआन के लिए आमंत्रित करने के बाद मुरली और मेंडिस को गेंद सौंपने में देर नहीं लगाई। भारत ने लंच से पहले ही वीरेंद्र सहवाग  (13) का विकेट गंवा दिया था जिन्हें मुथैया मुरलीधरन ने अपने पहले ओवर में ही पगबाधा आउट किया। पहली पारी के पराक्रम के कारण लक्ष्मण को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया लेकिन वह इस पारी में भी 'मेंडिस मानिया' से नहीं उबर पाए।

रहस्यमयी गेंदबाज अजंता मेंडिस ने लक्ष्मण (21) को पगबाधा आउट करके भारत का स्कोर दो विकेट पर 53 रन कर दिया। इसके बाद श्रीलंका ने अंपायर रेफरल प्रणाली का फायदा उठाया।

मुरलीधरन की गेंद तेंदुलकर (12) के बल्ले से लगकर तिलकरत्ने दिलशान के पास गई लेकिन मैदानी अंपायर ने अपील ठुकरा दी। श्रीलंका ने इस फैसले को तीसरे अंपायर के पास रेफर करवा दिया जिन्होंने भारतीय बल्लेबाज को आउट करार दिया।

गंभीर ने एक छोर संभाले रखा लेकिन मुरलीधरन की गेंद पर प्रसन्ना जयवर्धने ने बड़ी खूबसूरती से उन्हें स्टंप आउट कर दिया। गंभीर ने टीम की तरफ से सर्वाधिक 90 गेंद खेली और सबसे अधिक चार चौके लगाए। मुरलीधरन ने जल्द ही सौरव गांगुली (4) को भी पवेलियन की राह दिखाई।

द्रविड़ चाय के विश्राम से पहले मेंडिस की गेंद पर मालिंडा वर्णपुरा को कैच दे बैठे। इस बार भी रेफरल प्रणाली ने श्रीलंका का साथ दिया। मैदानी अंपायर ने द्रविड़ को नाबाद करार दे दिया था लेकिन तीसरी आंख से पता चल गया कि वह आउट हैं।

चाय के विश्राम के समय भारत का स्कोर छह विकेट पर 103 रन था। मुरलीधरन ने चाय के बाद अपने पहले ओवर में ही दिनेश कार्तिक (शून्य) को आउट करके 65वीं बार पारी में पांच या अधिक विकेट और 21वीं बार मैच में दस या इससे विकेट लेने का कारनामा दिखाया।

मुरलीधरन ने इसके बाद अनिल कुंबले (12) को बोल्ड किया जबकि मेंडिस ने अपने एक ओवर में जहीर खान (3) और हरभजन सिंह (15) की गिल्लियां बिखेरकर श्रीलंका को एसएससी मैदान पर यादगार जीत दिलाई। 

इससे पहले भारत ने सुबह पहली पारी में छह विकेट पर 159 रन से आगे खेलना शुरू किया। भारत को फालोआन बचाने के लिए बेजोड़ बल्लेबाजी की जरूरत थी लेकिन मुरलीधरन (84 रन देकर पांच विकेट)  और मेंडिस (72 रन देकर चार विकेट) के सामने किसी की नहीं चली।

मेंडिस ने खूबसूरत लेग ब्रेक पर लक्ष्मण को बोल्ड करके भारतीय पारी का अंत किया। लक्ष्मण ने इशांत शर्मा (नाबाद 13) के साथ अंतिम विकेट के लिए 35 रन की साझेदारी की। इशांत दूसरी पारी में भी पांच रन बनाकर नाबाद रहे।

इशांत की तारीफ करनी होगी क्योंकि वह 70 मिनट तक क्रीज पर टिके रहे और उन्होंने दोनों स्पिनरों को खासा निराश किया। इससे लक्ष्मण अपना 34वां टेस्ट अर्धशतक पूरा करने में भी सफल रहे।

कुंबले के खिलाफ मेंडिस की पगबाधा की अपील जब अंपायर बिली डाक्ट्रोव ने स्वीकार कर ली तो उन्होंने रेफरल प्रणाली का सहारा लिया लेकिन तीसरे अंपायर ने भी मैदानी अंपायर का फैसला सही करार दिया। हरभजन ने आते ही मुरलीधरन पर दो चौके जमाए लेकिन वह इसी गेंदबाज की गेंद पर वर्णपुरा को आसान कैच देकर पवेलियन लौटे। जहीर को भी मेंडिस ने पगबाधा किया।

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