डब्ल्यूटीओ की जंग : कमलनाथ से परेशान हैं विकसित देश
वार्ता
जिनेवा,
शुक्रवार,
जुलाई 25,
2008
व्यापार उदारीकरण के लिए चल रही डब्ल्यूटीओ की शिखर बैठक के महारथियों के बीच भारतीय दल के नेता एवं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कमलनाथ केंद्रीय भूमिका में छाए हुए हैं।
बातचीत में खींचतान और टकराव बढ़ गया है। अमेरिका की एक प्रतिष्ठित पत्रिका में लिखा गया है कि व्यापार वार्ताओं में भारत के व्यापार मंत्री ने विकसित देशों को परेशान किया। रिपोर्ट के मुताबिक श्री कमलनाथ ने बुधवार को यहां पहुंचने के बाद डब्ल्यूटीओ महासचिव पास्कल लेमी द्वारा बुलाई गई जी सात प्रमुख पक्षों की बैठक में लगातार 12 घंटे विकसित देशों के प्रस्तावों को खारिज करते रहे। इस समूह में अमेरिका, 27 देशों वाले यूरोपीय संघ, जापान, चीन, भारत, ब्राजील और आस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस शिखर बैठक में 30 से ज्यादा देशों के मंत्री आए हैं।
संवाददाता जान डब्ल्यू मिलर की रिपोर्ट में अमेरिकी वाणिज्य मंडल के नीतिगत मामलों के निदेशक क्रिस्टोफर वेंक के हवाले से कहा गया है कि इस दौर की बातचीत का भविष्य कमलनाथ के हाथों में है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्यूटीओ की शिखर वार्ता में मैराथन बैठकों की भाषा में कटुता आने लगी है। वार्ताओं की इस जंग में अगर कोई एक व्यक्ति केंद्रीय भूमिका में उभरा है तो वह हैं भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ। बुधवार की बैठक के बारे में यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त पीटर मेंडलसन को यह कहते हुए उद्धरित किया गया है कि उनके चार वर्ष के कार्यकाल की यह सबसे कठिन और टकराव भरी वार्ता रही।
कमलनाथ की यह ताकत तेजी से बढ़ रहे भारतीय बाजार की 2001 में दोहा दौर की बातचीत शुरू होने के समय भारत का वार्षिक आयात 57 अरब डॉलर था आज यह बढ़ कर 217 अरब डॉलर हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने कल भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से व्यापार समझौते के बारे मे फोन पर बात की जो भारत के बढ़ते महत्व का सबूत है।
रिपोर्ट के अनुसार बुधवार की बैठक कल सुबह साढ़े तीन बजे तक चली और फिर कल रात साढ़े नौ बजे इसमें गतिरोध पैदा हो गया था और आज यह फिर शुरू हुई। श्री कमलनाथ 21 जुलाई को शुरू हुई इस बैठक में भारत में सरकार के विश्वासमत की व्यवस्तता के कारण 23 को शामिल हो सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्री कमलनाथ भारत अपने देश में नए उभर रहे मोटर वाहन जैसे उद्योगों और प्रमुख खाद्य पदार्थों को बचाने के लिए ऊंचे आयत शुल्क आरोपित करने के अधिकार की आवश्यकता पर अड़े हुए हैं।
कमलनाथ ने अमेरिका की कृषि व्यापार नीति की आलोचना करते हुए भारत में कृषि पर आश्रित करोड़ों गरीबों की आजीविका का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत के कृषि व्यापार नहीं करोड़ों की आजीविका है। विकसित देश कृषि सब्सिडी खत्म कर विकासशील देशों में कृषि को निवेश के लिए आकर्षक बनाने का रास्ता खोलें।
श्री कमलनाथ ने प्रेमवर्क समझौते और हांगकांग बैठक के प्रस्तावों का जिक्र करते हुए कहा कि विकसित देश औद्योगिक वस्तुओं के बाज के बारे में अपने पिछले वयदों से मुकर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि गैर कृषि बाजार पर शुल्क कटौती के फार्मूले में विकासशील दशों को बिना शर्त रियायत मिलनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक चीन इन वार्ताओं में एक शांत भागीदार की भूमिका में है।