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 IST 5,  2008  19:54 सितंबर Last Updated :
  • एनएसजी में एटमी करार
  • एनएसजी में करार पर सहमति के आसार
  • अमेरिकी उप मंत्री का बयान
दुनिया से
परमाणु करार पर बुश ने की मनमोहन से बात
एएफपी
वाशिंगटन, शुक्रवार, जुलाई 25, 2008
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अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को फोन कर दोनों देशों के विवादों से घिरे परमाणु करार पर आगे बढ़ने के लिए संयुक्त प्रयास करने के बारे में विचार विमर्श किया।

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता गार्डन जानड्रो ने एक बयान में कहा, 'दोनों नेताओं ने अपनी इच्छा व्यक्त की कि वे अमेरिका भारत असैन्य परमाणु करार मुद्दे पर यथासंभव शीघ्रता से आगे बढ़ना चाहते हैं।'

प्रवक्ता के अनुसार बुश ने सिंह से कहा, 'वह अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी (मनमोहन की) सरकार के साथ काम करने को उत्सुक है।'

जानड्रो के अनुसार दोनों नेताओं के बीच विश्व व्यापार संगठन की बाधित वार्ता के बारे में भी बातचीत हुई।

जानड्रो ने कहा कि बुश और मनमोहन ने गतिरोध तोड़ने के लिए सभी प्रमुख डब्ल्यूटीओ सदस्यों के योगदान के बारे में विचार विमर्श किया ताकि दोहा वार्ता दौर इस वर्ष के अंत तक एक महत्वाकांक्षी समझौते को संपन्न करने की राह पर आ जाये।

बुश और मनमोहन की यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति भवन की सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के साथ होने वाली बातचीत से पहले हुई है।

अमेरिका और भारत परमाणु सहयोग समझौते के बारे में आवश्यक अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने के प्रयास में लगे हुए हैं। इस समझौते के बारे में दोनों देशों के बीच 2005 में सहमति बनी थी।

भारत ने कहा कि वह अंतिम अंतरराष्ट्रीय मंजूरी हासिल करने के मकसद से लाबिंग के लिए अपने दूतों को भेज रहा है। भारत सरकार ने यह पहल परमाणु करार के मुद्दे पर हाल में संसद का विश्वास जीतने के बाद किया है जिसका वाम दल कड़ा विरोध कर रहे हैं।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय के अधिकारी नयी दिल्ली से रवाना हो गए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का समर्थन हासिल किया जा सके।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि आवश्यक सुरक्षा मानक समझौते और प्रमुख भारत असैन्य परमाणु रिएक्टरों को संरा निगरानी में लाने के लिए वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक आईएईए में अपने समकक्षों से संपर्क बना रहे हैं।

इसके अलावा भारत को एनएसजी से छूट हासिल करनी होगी। समूह के नियम के तहत गैर एनपीटी राज्य के साथ परमाणु ईंधन और प्रौद्योगिकी का व्यापार नहीं किया जा सकता।
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