कर्ज चुकाते बीते 63 सावन, अब रचाई शादी
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
तंजावुर,
बुधवार,
जुलाई 9,
2008
कहते हैं जननी का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता है। हालांकि कलयुग में लोग इस बात को भूलते जा रहे हैं, लेकिन 63 साल के एस हरि दास ने अपने समर्पण से लोगों को एक बार फिर इस हकीकत से रू-ब-रू कराया।
ताउम्र अपनी बीमार मां की सेवा करते रहने वाले हरि ने दो साल पहले तक अपना घर बसाने के बारे में सोचा भी नहीं। हालांकि मां अब नहीं रहीं।
एक बेटे का फर्ज निभाने के बाद आखिरकार दास ने बुधवार को अपनी 50 साल की भांजी के साथ शादी रचा ली।
हरि ने बताया, "बीमार मां की सेवा करने के सुख ने मेरे मन में कभी भी घर बसाने की बात नहीं आने दी। 92 साल की उम्र में दो साल पहले मेरी मां का स्वर्गवास हो गया। तब जाकर मुझे एहसास हुआ कि मैं अकेला हूं और मुझे भी साथी की जरूरत है।"
हरि ने आगे कहा कि वह अच्छी तरह जानते हैं कि वह कभी पिता नहीं बन सकते लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव पर वह अपनी पत्नी के साथ सुख-दुख बांट सकते हैं। कभी जरूरत पड़ी तो वह और उनकी पत्नी बच्चा गोद लेने के बारे में सोचेंगे।
हरि की शादी में जुटे लोगों में एक 60 वर्षीय के. नंदागोपालन ने कहा, "आमतौर पर हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की शादी की 60वीं सालगिरह मनाने के लिए जुटते हैं। लेकिन यह मामला बिल्कुल अलग है। हरि अपनी मां से इतना प्यार करता था कि उसे कभी महसूस भी नहीं हुआ कि वह बूढ़ा हो गया।"