आज आप किसी भी भारतीय खेलप्रेमी से अगर सवाल करें कि इस बार बीजिंग ओलम्पिक में कौन भारतीय पदक जीत सकता है... शायद ज्यादातर लोग राज्यवर्धन राठौर के नाम के साथ जाना चाहेंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं, भारत सहित दुनिया-भर के निशानेबाजों के सर्किट में एक और भारतीय नाम को बड़े अदब से लिया जाने लगा है - वह है दिल्ली के डबल ट्रैप शूटर रोंजन सोढी का।
यूं तो रोंजन पिछले दो साल से कमाल का निशाना साध रहे हैं, लेकिन पिछला महीना उनके लिए लाजवाब साबित हुआ। बेलग्रेड में हुए वर्ल्ड कप में उन्होंने न सिर्फ़ अपने रोल मॉडल राज्यवर्धन राठौर को पछाड़ा, बल्कि डबल ट्रैप में दो वर्ल्ड रिकॉर्ड भी कायम किए। रोंजन ने क्वालिफाइंग में 147/150 और फाइनल में 194/200 का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर दुनिया-भर के निशानेबाजों को हैरान कर दिया। ओलम्पियन मनशेर सिंह भी रोंजन की तारीफ़ के पुल बांधते नही थकते, और कहते हैं, राठौर ने ओलम्पिक पदक जीतकर भारतीय शूटिंग को एक अलग पायदान पर पहुंचाया था, अब रोंजन इसे एक स्तर ऊपर ले गए हैं, क्योंकि इससे पहले क्ले-शूटिंग में भारतीय निशानेबाजों ने पदक तो जीते हैं, लेकिन वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का कारनामा पहली बार हुआ है।
रोंजन ने वर्ल्ड कप में पहली बार स्वर्ण पदक जीता है. उनकी खुशी इसलिए भी चौगुनी हो गई है, क्योंकि उन्होंने प्रतियोगिता में करीब एक दशक पहले रिकॉर्ड कायम करने वाले इटली के डैनिएल डि स्पिंगो, 2000 सिडनी ओलम्पिक के स्वर्ण पदक विजेता रिचर्ड फॉल्ड्स और राठौर जैसे दिग्गजों के दिल पर अपना सिक्का चला दिया। जीत के बाद राठौर और स्पिंगो जैसे दिग्गजों की शाबाशी जीतना रोंजन के लिए अपने आप में किसी पदक से कम नहीं है।
रोंजन को मलाल है तो इस बात का, कि वह इस बार अब तक बीजिंग ओलम्पिक के लिए कोटा स्थान हासिल नहीं कर पाए हैं, लेकिन उनकी इस जीत के बाद से भारतीय शूटिंग संघ और भारतीय ओलम्पिक संघ ज़ोर-शोर से उनके लिए लॉबिन्ग कर रहा है, ताकि उन्हें बीजिंग के लिए हार्डशिप कोटा मिल जाए। इन्हें लगता है, अगर रोंजन को राठौर के साथ डबल ट्रैप में ओलम्पिक में उतरने का मौका मिला तो भारत के पदक जीतने की उम्मीद बढ़ जाएंगी। ख़ुद रोंजन को लगता है कि उन्हें बीजिंग में अपनी गन को आजमाने का मौका मिल जाएगा। वह कहते हैं, एशिया में इस बार सिर्फ़ चार एशियाई खिलाड़ियों को कोटा मिला है - एथेंस के स्वर्ण पदक विजेता सऊदी अरब के अहमद अल मख्तूम और रजत पदक विजेता राज्यवर्धन राठौर, चीन के हु बिनयुआन और पैन किआंग को - जबकि यूरोप से आठ खिलाड़ियों ने कोटा स्थान हासिल किया है।
इसीलिए रोंजन को पूरा भरोसा है कि इस महीने के तीसरे हफ्ते के शुरू होने से पहले वह भी कोटा स्थान हासिल कर लेंगे और राठौर की लीग में आकर निशाना लगाएंगे। अचानक ओलम्पिक प्रतियोगिता में उतरकर निशाना न साधना पड़े, इसलिए अभ्यास के लिए वह ऑस्ट्रेलिया का रुख कर चुके हैं, जहां वह राठौर के पूर्व कोच रसेल मार्क के साथ कोचिंग कर रहे हैं।
दरअसल राठौर और रोंजन में इस वक्त कई समानताएं दिख रही हैं। एथेंस के पदक से पहले राठौर भी इसी तरह लाजवाब फॉर्म में थे, उन्होंने भी पहले निकोसिया में वर्ल्ड चैम्पियनशिप का पदक जीतने का कारनामा किया था और कोच रसेल मार्क ने उन्हें भी कामयाबी के गुर बताए थे। ये सभी संकेत भारतीय शूटिंग के चमकते भविष्य की ओर इशारा कर रहे हैं।
भारतीय मीडिया भले ही रोंजन के नाम को खास तवज्जो नहीं दे रहा हो, मगर विदेशी मीडिया, खासकर चीन और ऑस्ट्रलियाई पत्रकार, रोंजन को पदक का बहुत मज़बूत दावेदार मान रहे हैं। बेलग्रेड में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद चीन के एक संवाददाता रेन यान ने प्रतिष्ठित अखबार 'पीपल्स डेली' के लिए भारत में रोंजन का लंबा इंटरव्यू किया। रेन यान कहते हैं कि चीन में सभी भारतीय शूटरों को पदक का मज़बूत दावेदार माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कारपोरेशन के माइकेल कोगैन की राय भी इससे ज्यादा अलग नहीं है। उनका मानना है कि भारतीय शूटिंग टीम इस बार इतिहास कायम कर सकती है और अगर मौका मिला तो खेलप्रेमी यह इतिहास रोंजन के 12 बोर के बेरेटा गन के ज़रिये देख सकेंगे।