ओलंपिक मशाल थामने का मौका पा रोमांचित हैं मीना
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली,
मंगलवार,
जुलाई 1,
2008
चीन में रहकर काम करने वाली मीना बारोट के लिए 7 जुलाई रोमांच और गौरव से भरा दिन होगा। वह एकमात्र भारतीय होंगी, जिन्हें चीन में ओलंपिक मशाल थामने का गौरव प्राप्त हुआ है।
हालांकि मीना को इस बात का अफसोस है कि रोमांच और गौरव से भरे उनके इस अनुभव को साझा करने के लिए उनके माता-पिता उनके साथ नहीं होंगे क्योंकि खराब स्वास्थ्य के कारण दोनों को गुजरात वापस आना पड़ा है।
बहरहाल, इसके बावजूद, मीना का रोमांच कम नहीं हुआ है। वह कहती हैं कि 7 जुलाई को उन्हें खुद पर गर्व होगा क्योंकि वह चीन में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।
7 जुलाई को मीना चीन और दुनिया भर की मीडिया के सामने 200 मीटर तक मशाल लेकर चलेंगी। एक भारतीय कंपनी के लिए काम करने वाली 36 साल की मीना उन आठ विदेशियों में शामिल हैं, जिन्हें गांसू प्रांत के लांझयू शहर में ओलंपिक मशाल थामने का मौका मिलेगा। अन्य विदेशियों में अमेरिका और वेनेजुएला की दो महिलाएं, फिलीपींस, जर्मनी, जापान, कोलंबिया और रूस के पांच पुरुष शामिल हैं। इन लोगों को एक ऑनलाइन प्रतियोगिता के माध्यम से 47 देशों के 262 लोगों के बीच से चुना गया है।
2005 से चीन में रह रहीं मीना ने बताया, 'मेरे लिए यह गौरव से भरा शानदार क्षण होगा। एक बड़े प्लेटफार्म पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने से अच्छी बात भला और क्या हो सकती है। मुझे तो अब तक यकीन नहीं हो रहा है। मैं रोमांचित भी हूं, खुश भी हूं और थोड़ी नर्वस भी हूं।'