• Sign Up
  • |
  • Sign-In Sign Out
  • |
  • Make us your home
  • |
  • RSS
1 42 Video %>
1 52 News %>
1 57 Photo %>
1 64 Interactives %>
1 69 Leisure %>
1 74 Filmhai %>
1 80 Auto Guide %>
1 141 Dharm and Sahitya %>
1 81 Astro %>
1 179 Jobs %>
B2B
 IST 11,  2010  20:25 मार्च Last Updated :
फोकस
सामंती सड़ांध की जगह आधुनिकता की बदबू
एनडीटीवी इंडिया संवाददाता
नई दिल्ली, शुक्रवार, मई 23, 2008
टिप्पणियां:
पढ़ें (1)
आरुषि के कत्ल की कहानी हमारे समाज के बढ़ते अंधेरे की कहानी भी है। ऐसा नहीं है कि हमारे यहां 14 साल की बच्ची पहली बार मारी गई है। ऐसा भी नहीं कि किसी बाप ने अपनी बेटी की पहली बार हत्या की हो। लेकिन ऐसी हत्याओं में आमतौर पर दिखाई पड़ने वाली सामंती सड़ांध के मुकाबले यहां एक आधुनिकता की बदबू है, जो हमें नाक पर रूमाल रखने को मजबूर करती है।

देश की राजधानी से सटे एक अभिजात इलाके के एक कुलीन घर में एक अकेली बच्ची पहले अपने घरवालों को कुछ ऐसा करता देखती है, जिसे उसकी किताबें, उसके गुरु अनैतिक बताते रहे हैं। फिर वो खुद किसी अकेलेपन में ऐसे ही अंधेरे की शिकार हो जाती है। ये प्रचलित नैतिकता के इरादतन उल्लंघन का मामला होता तब भी इतना अफसोस पैदा नहीं करता।

कायदे से ऐसी किसी नैतिकता के उल्लंघन पर भी बहुत हायतौबा मचाने की जरूरत नहीं है। लेकिन जब हम इस कहानी की सारी कड़ियों को जोड़ते हैं तो हमें अपने आसपास एक ऐसा समाज दिखता है, जिसके पास जीने का कोई तर्क नहीं है। उसके पास पैसा है, सीमाएं लांघने की फुरसत है और दूसरों की नकल का वह उत्साह है, जो कहीं भी ले जा सकता है। लेकिन जब उसे अपने ही किसी रिश्ते के आईने में अपनी बेताब इच्छाओं का भद्दा चेहरा दिखाई पड़ता है तो वो हथियार उठा लेता है, गर्दन काट देता है और लाश छत पर छोड़कर पुलिस को गुमराह करता है। ये एक शातिर डॉक्टर का नहीं, बीमार समाज का अपराध है, जिसे आरुषि जैसी असुरक्षित लड़कियां झेलती हैं।
टिप्पणियां:
पढ़ें (1)
टिप्पणियां
DR. Rajesh ne apni ekloti beti ka katal karke badi hi safayee se apne bachne ki yojna banayee thi. Par wo pakda hi gaya. uski beti ka hemraj se sambandh ... पढ़ें
RAJNI AGASTYA, ONLYRAJNI@INDIATIMES.COM, DELHI
 
खोजें
 
फोकस
अस्सी के दशक के अंतिम समय में पैदा (जनरेशन वाई) हुए लोग नौकरी को अपने बिलों के भुगतान का जरिया समझते हैं तथा पुरानी पीढ़ी की तुलना में अपने आराम के समय को ज्यादा महत्व देते हैं।