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भारत से
वेणुगोपाल की सेवानिवृत्ति गलत : सुप्रीम कोर्ट
भाषा
नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, मई 8, 2008
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केंद्र सरकार को करारा झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को वह कानून रद्द कर दिया जिसमें प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक पी वेणुगोपाल को सेवानिवृत्त करने का प्रावधान था। इस निर्णय के आते ही भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबूमणि रामदास ने के इस्तीफे की मांग कर डाली है। इस इस्तीफे की मांग के ज़वाब में रामदास ने साफ कह दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। डॉ वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा है कि वे एम्स की सेवा करते रहेंगे।

वेणुगोपाल के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास के साथ मतभेद गहराने के बाद इस कानून को अमल में लाया गया था। न्यायमूर्ति तरूण चटर्जी और एचएस बेदी की खंडपीठ वेणुगोपाल की अपील बरकरार रखते हुए कानून रद्द कर दिया। वेणुगोपाल ने याचिका में इस कानून को चुनौती देते हुए कहा था कि यह भेदभावपूर्ण है और उन्हें पद से हटाने के लिए दुर्भावनावश लाया गया है। वेणुगोपाल की दलील थी कि संशोधन का एकमात्र उद्देश्य रामदास के साथ मतभेदों के चलते उन्हें पद से हटाना था।

एम्स अधिनियम से जुड़े इस संशोधन में निदेशक की सेवानिवृत्ति की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष तय कर दी गई थी जिसकी वजह से वेणुगोपाल को सेवानिवृत्त होना पड़ा था।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व कानून मंत्री अरूण जेटली ने वेणुगोपाल की ओर से तर्क दिया कि यह अधिनियम गैरकानूनी है क्योंकि उच्च न्यायालय ने पिछले साल मार्च में वेणुगोपाल के निदेशक के पद पर बने रहने के फैसले को बरकरार रखा था। साथ ही यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। लेकिन केंद्र सरकार इस बीच ही संसद में संशोधन ले आई।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से येह साबित होता है कि सरकार अपनी बात मनवाने के लिए किस हद तक जा सकती है।
इश्वरनाथ झा, ishwarnjha@rediffmail.com, बिहार शरिफ
 
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